जीतू के लिए विधायकों को फिर जाना पड़ा भोपाल

· Indore

जीतू के लिए विधायकों को फिर जाना पड़ा भोपाल

इंदौर। जीतू यादव की एमआईसी में वापसी रमेश मेंदोला के लिए इज्जत बन गई थी और जिस तरह महापौर ने शुरुआत में ठेंगा दिखाया था, उसने बेचैन कर रखा था। अब जाकर कहीं चैन है कि घर के बाद ताकत की वापसी हो गई है। इसके लिए उन्हें फिर भोपाल जाना पड़ा है।

पिछली बार गए थे तो जीतू की भाजपा में एंट्री करा आए थे और अब एमआईसी में वापसी करा लाए। साथ में गोलू शुक्ला थे। सुमित मिश्रा को तो होना ही था कि जहां दो नंबर विधायक रहते हैं, वहां रहते हैं और फिर तीन नंबर वाले भी थे। हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात हुई और वहीं से महापौर को फोन लगा है। रणवीर सिंह रावत को साधा है और काम बन गया। वैसे शहर अध्यक्ष को लेकर अलग-अलग बातें हो रही हैं। महापौर खुश नहीं हैं और जीतू यादव ने मान लिया है कि जिस तरह मदद मिलनी चाहिए थी, नहीं मिली। बावजूद इसके कि वो रमेश मेंदोला के करीब हैं। अब भोपाल में दोनों विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष के अलावा किससे मुलाकात की, कहां बात हुई और कहां मामला सुलझा, इसकी खोज है। लेकिन जीतू के लिए दो विधायकों का उतावलापन काफी कुछ कह रहा है। दो बार भोपाल का सफर किया गया और बड़े नेताओं से गुहार लगाई गई, तब कहीं जाकर बात बनी और महापौर को वो करना पड़ा, जिसके लिए तैयार नहीं थे। हालांकि अब सफाई दी जा रही है कि मेरा कोई लेना-देना ही नहीं था। संगठन ने रोक रखा था, इसलिए नहीं ले रहा था। वहां से हरी झंडी मिली तो ले लिया। सब इंदौर में नहीं, बल्कि मुंबई पहुंचकर किया, क्योंकि महापौर अमेरिका जा रहे हैं। लेकिन रास्ते में ही उन्होंने जीतू का काम कर दिया। भरपूर सफाई है, जिसे दो नंबर वाले मान नहीं रहे हैं। उन्होंने पहले दिन से तय कर रखा है कि जो गड़बड़ हुई है और जितनी देरी लगी है, उसकी वजह में प्रथम नागरिक शामिल हैं। वैसे खेल इतनी आसानी से हुआ नहीं है। पापड़ बेलने पड़े हैं। रुकावट बने रणवीर सिंह रावत को साधने के लिए रमेश मेंदोला ने पूरी ताकत लगाई है। ऊपर के नेताओं को फोन तो लगवाए ही, जीतू यादव को उनके पास भेज दिया था।

वहां उन्होंने लंबी-चौड़ी सफाई दी और रावत से कहा कि मेरा कोई गड़बड़ मामला नहीं है, कोई मुकदमा नहीं है और कोई भाजपाई मुझसे खफा नहीं है। यहां तक कि चार नंबर का जिक्र कर दिया कि उनसे पूछ सकते हैं। सब मेरी वापसी चाहते हैं, फिर क्यों रोका जा रहा है ? इस सफाई का फायदा हुआ और दूसरी तरफ मेंदोला ने ताकत लगाई। ऊपर से बड़े नेताओं की हामी मिली और आखिरकार जीतू यादव की एमआईसी में वापसी हो गई। यानी पिछली बार भाजपा में एंट्री और इस बार भोपाल से एमआईसी में वापसी,दोनों ही काम मेंदोला की कोशिशों से हुए हैं। जीतू को रोकने चार के लिए नंबर के नेताओं का विरोध काम नहीं आया।