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जिम्मेदारी पर बुलडोजर…!
मध्यप्रदेश में किसी भी बात के लिए नेता और अफसर जिम्मेदार नहीं! भले मौतें कितनी हों, जिम्मेदार बेफिक्री से काम करते रहते हैं। छिंदवाड़ा में जहरीली दवा से पच्चीस बच्चे मर गए, कोई जिम्मेदार नहीं। इंदौर में गंदे पानी ने पैंतीस जानें ले लीं, किसी का बाल बांका न हुआ। बालाघाट में तीस आदिवासी बच्चे लापरवाही से मरे, कान पर जूं नहीं रेंगी। बरगी बांध में नौ लोग डूबे, जिम्मेदार मस्ती में तैरते रहे। सागर में बाइस लोग जहरीली शराब से जान गंवा बैठे, कोई जिम्मेदार नहीं! सरकार मानकर चलती है कि लोग तो आए दिन मरेंगे ही, कब तक जिम्मेदार ठहराते रहेंगे! इससे बेहतर यह कि मुलजिमों के घर पर बुलडोजर चला दो, जिम्मेदारी खत्म! यदि सरपंच की कोठी बगैर इजाजत तनी थी तो उसे तोड़ने के लिए इतनी मौतों का इंतजार चल रहा था? क्या गलत काम हाथोंहाथ नहीं हटना चाहिए! सही काम क्या केवल निर्दोष लोगों की बलि पर ही होंगे! जब तक हादसों के लिए नेता और अफसरों की लापरवाही पर बुलडोजर नहीं चलेगा, जिम्मेदारी का भाव नहीं आएगा। अचरज तो तब होता है, जब हटाया अफसर और कीमती जगह पा जाता है, मानो उसे सजा की जगह इनाम दिया हो। एक भी मंत्री नाकामी के चलते नहीं हटाया। जो मंत्री गैरजिम्मेदारी के चलते सबसे बड़ी अदालत से जलील हुआ, उसे बचाने के लिए पूरा मंत्रिमंडल एक हो गया। सेना का अपमान भी इस सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर नहीं कर पाया और अदालतों के