रिपोर्ट पर फैसला

· Indore

रिपोर्ट पर फैसला

बरकतउल्ला कॉलेज, भोपाल की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर और कुलाधिपति (राज्यपाल) के अनुमोदन के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत ऑटोनॉमस कॉलेजों से एफिलिएशन शुल्क न लेने का निर्णय लिया गया है। हाल ही में आयोजित कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक के समक्ष इस आदेश और संशोधन प्रस्ताव को सर्वसम्मति से परिनियम में संशोधन को हरी झंडी दे दी है। इस संशोधन के लागू होने से राज्य के ऑटोनॉमस कॉलेजों को न केवल आर्थिक बचत होगी, बल्कि यूजीसी के मानकों के अनुरूप उच्च शिक्षा के नए सुधारों को बिना किसी कानूनी अड़चन के लागू किया जा सकेगा।

नए रेगुलेशन से शुरू हुआ विवाद : यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन द्वारा 3 अप्रैल 2023 को भारत के राजपत्र में ऑटोनॉमस कॉलेज के लिए नया रेग्युलेशन 2023 प्रकाशित किया गया था। इसकी कंडिका 3.5 में यूजीसी ने स्पष्ट किया कि ऑटोनॉमस कॉलेज को मूल कॉलेज को कोई एफिलिएशन फीस देने की आवश्यकता नहीं है। वही कंडिका 3.4 में था कि कॉलेज अपनी परीक्षाएं खुद आयोजित कर रिजल्ट घोषित करेंगे और मार्कशीट जारी करेंगे, हालांकि अंतिम डिग्री पर कॉलेज के नाम के साथ मूल कॉलेज का नाम दर्ज रहेगा। कंडिका 4.3 के मुताबिक ऑटोनॉमस दर्जा मिलने के बाद भी कॉलेज मूल यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहेंगे और ऑटोनॉमसता के अधिकारों का उपयोग करेंगे।

कोर्ट में भी गया मामला

यूजीसी के इस स्पष्ट नियम के बावजूद राज्य के कॉमन परिनियम-36 में पुराना प्रावधान होने से कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के बीच शुल्क वसूली को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही थी। इससे मामला कोर्ट तक चला गया था। इस कानूनी और प्रशासनिक भ्रम को दूर करने के लिए स्थाई कमेटी की सिफारिश पर शासन द्वारा 30 सितंबर 2024 को एक विशेष कमेटी का गठन किया गया था।

यूनिवर्सिटी पर भी असर

इस फैसले के बाद देवी अहल्या यूनिवर्सिटी के लिए एक और बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई। खरगोन में बने क्रांतिसूर्य टंट्या भील यूनिवर्सिटी में करीब 80 कॉलेज चले जाने के बाद यूनिवर्सिटी को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ था। अब शहर के सात कॉलेज से यूनिवर्सिटी और फीस नहीं वसूल सकेगी। यह सारे कॉलेज कई कोर्सेस चलाते है, जिससे लाखों रुपए एफिलएशन फीस के रूप में वसूले जाते हैं। हालांकि यूनिवर्सिटी ने अब इसकी प्रतिपूर्ति के लिए नया रास्ता निकाला है। उसने इन कॉलेज पर मार्कशीट वेरिफिकेशन के नाम से नया शुल्क लगा दिया है। इसमें प्रति विद्यार्थी शुल्क लिया जा रहा है। उसका कहना है कि यूनिवर्सिटी मार्कशीट वेरिफाई करती है तो उसे इसका अधिकार है। हालांकि इस पर भी विवाद शुरू हो गया है। कॉलेजों का कहना है कि जब परीक्षा से लेकर रिजल्ट, मार्कशीट प्रिंटिंग तक सबकुछ हम ही कर रहे है तो फिर इस शुल्क की जरूरत क्या है।