लेफ्ट-टर्न पर दुकान, फुटपाथ पर सामान, पुल पर गाड़ी

इंदौर. नगर प्रतिनिधि। शहर के बिगड़ैल ट्रैफिक को सुधारने के लिए बैठकों में जितनी बातें होती हैं, सड़क पर नजर नहीं आती। इसमें ट्रैफिक पुलिस से ज्यादा नगर निगम गुनाहगार लगती है, जिसका रिमूवल अमला कब्जों को रोकने की या तो कोशिश नहीं करता या पनाह देता है। नगर निगम की रिमूवल गैंग को जितनी मुस्तैदी से काम करना चाहिए, नहीं करती। वजह ये कि अमला केवल अधिकारियों के आदेश पर काम करता है। खुद सड़क पर कब्जे देखकर भी चुप रहता है कि हंगामा न हो जाए। हालांकि इसकी आड़ में कुछ कर्मचारी जेब गरम कर लेते हैं और दुकानदार भी ऐतराज नहीं करते कि फायदा ज्यादा, नुकसान कम है।
सत्यसाईं चौराहा
पुल बना रही कंपनी ने पहले ही सड़क घेर ली है, गाड़ियां सर्विस रोड से गुजरती हैं। इसके बावजूद बांबे हास्पिटल चौराहे से आने वाले ट्रैफिक के लेफ्ट टर्न पर गणेश प्रतिमाओं की दुकानों को इजाजत दे दी गई। वैसे पहले ज्यादा दुकानें लगती थीं। सबको मंजूरी नहीं मिली है। उन्हें कोई और जगह दी है, लेकिन सवाल ये कि जो लगी हैं, उन्हें भी दूसरी जगह क्यों नहीं भेजा। इन दुकानों के आगे गाड़ियां खड़ी हो जाती हैं। दोपहर से रात तक ट्रैफिक का कचूमर निकल जाता है, लेकिन न तो नगर निगम को परवाह है, न पुलिस को।
पाटनीपुरा चौराहा
भमोरी से पाटनीपुरा चौराहे तक चौड़ी सड़क के लिए तमाम मकान तोड़े गए। फिर सड़क पर लगने वाली सब्जी मंडी भी हटा दी गई, लेकिन सड़क के दूसरी तरफ दुकानदारों पर जोर नहीं चल रहा। इन्होंने फुटपाथ जीम लिया है। उस पर ही सामान रखते हैं। खासकर तीज-त्यौहार पर तो सड़क तक कब्जा कर लेते हैं, लेकिन नगर निगम की रिमूवल गैंग इन्हें कभी नहीं हड़काती। चौराहे के लेफ्ट टर्न पर भी कब्जा है, जिसे हटाने में नगर निगम नाकाम रहा है। किसी को लेफ्ट टर्न से एमआईजी थाने तरफ जाना हो तो नहीं जा सकता।
भागीरथपुरा पुल
परदेशीपुरा से भागीरथपुरा, एमआर-4, बाणगंगा, लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन आने-जाने के लिए लोग भागीरथपुरा के जिस पुल का इस्तेमाल करते हैं, उस पर से शाम को निकलना आसान नहीं है। पुल के एक तरफ लोडिंग गाड़ियां खड़ी रहती हैं, दूसरी तरफ सब्जीवाले डेरा जमा लेते हैं। ट्रैफिक जाम होता रहता है, लेकिन मजाल कि नगर निगम का अमला कार्रवाई कर दे। जरूरत तो ट्रैफिक पुलिस की भी है कि लोडिंग गाड़ियों के चालान बनाए, जब्त करे और आगे से गाड़ियां खड़ी न हो, इसके लिए चेतावनी बोर्ड लगाए, लेकिन कुछ नहीं कर रहे।