‘पिनेकल दी ग्रैंड’...… फर्जीवाड़े के इंतहा की मिसाल

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‘पिनेकल दी ग्रैंड’...… फर्जीवाड़े के इंतहा की मिसाल

‘पिनेकल दी ग्रैंड’ एक बार फिर सुर्खियों में है कि क्राइम ब्रांच ने उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है, जिनके खिलाफ कलेक्टर दफ्तर, नगर निगम और टीएंडसीपी से लेकर हाईकोर्ट तक में शिकायतकर्ता दस्तक दे चुके थे। टाउनशिप के नाम पर मोटी रकम वसूलने के बाद भी रजिस्ट्री के लिए हैरान-परेशान करने वाले अब अपने ही जाल में उलझते नजर आ रहे हैं।

इंदौर. नगर प्रतिनिधि। जांच के मुताबिक निपानिया में खसरा नंबर- 260/1, 261/1, 261/2 और 264/1 की 8.991 हेक्टेयर (लगभग 22 एकड़) जमीन पर नीना अग्रवाल और रितु अग्रवाल की पावर ऑफ अटॉर्नी पर संजय अग्रवाल ने “पिनेकल दी ग्रैंड” टाउनशिप की नींव रखी और प्लॉट के सौदे कर बड़ी रकम हासिल की। पहले डेवलपमेंट आशीष दास कर रहे थे, जिन्हें हटाकर संजय अग्रवाल ने फर्म सिमन कंस्ट्रक्शन और सिमन इंफ्रास्ट्रक्चर के साझेदार गुरनामसिंह धालीवाल से हाथ मिलाया और डेवलपमेंट अपने कंट्रोल में ले लिया।

कुछ समय बाद “सिमन कंस्ट्रक्शन” और “सिमन इंफ्रास्ट्रक्चर” का नाम बदलकर श्री जेएसएम देवकॉन और श्री जेएसएम देवकॉन इंडिया कर दिया, जो दास की फर्मों के नाम से मिलते-जुलते थे। ऐसा इसलिए किया कि ग्राहकों को लगे आशीष दास ही काम कर रहे हैं।

9.30 एकड़ जमीन बेच दी- संजय अग्रवाल ने आठ जून 2015 को 4 एकड़ और सात अक्टूबर 2015 को 5.30 एकड़ जमीन इन फर्मों के नाम कर दी। इस जमीन में आने वाले प्लॉट पहले ही रिजर्व कर बदले में पैसा लिया जा चुका था। इसी कड़ी में विक्की जेठवानी, प्रीतम माटा और उनके परिवार के नाम रजिस्ट्री की गई, ताकि शिकायतकर्ताओं के प्लॉट मांगने पर कह सकें कि पहले ही बेच चुके थे।

नगर निगम से भी धोखा-संजय अग्रवाल ने कॉलोनी की विकास अनुमति के लिए नगर निगम में पेश बंधक-पत्र कहा था कि जमीन केवल नीना अग्रवाल और रितु अग्रवाल की है, जबकि 9.30 एकड़ हिस्सा फर्म श्री जेएसएम देवकान्स और श्री जेएसएम देवकॉन इंडिया को बेचा जा चुका था। इसके उजागर होने पर नगर निगम ने थाना लसूड़िया में शिकायत की, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। विकास अनुमति के लिए जिन प्लॉट को बंधक रखा था, उनमें से प्लॉट नंबर- 100 को 20 जुलाई 2017 को बेच दिया दिया गया।

{धालीवाल से किनारा-प्लॉट के लिए परेशान हो रहे लोगों की बार-बार गुजारिश के बाद भी रजिस्ट्री नहीं की गई तो कलेक्टर को शिकायत हुई। वहां संजय अग्रवाल ने कहा- गुरनाम सिंह धालीवाल को नहीं जानता, किंतु जांच में फर्म श्री जेएसएम देवकान्स और श्री जेएसएम देवकॉन इंडिया के पार्टनर के तौर पर धालीवाल की तरफ से की गई रजिस्ट्री में संजय अग्रवाल के दस्तखत सहमतिदाता के तौर पर मिले।

{मुजरिमों को बना दिया फरियादी-जांच में यह भी सामने आया कि अग्रवाल और धालीवाल ने सांठ-गांठ कर धालीवाल के माध्यम से थाना लसूड़िया में 10 सितंबर 2023 को शिकायतकर्ताओं के नाम का झूटा उपयोग कर अपराध क्रमांक-1296/2023 दर्ज कराया, जिसमें असल पीड़ितों को फरियादी न बनाकर स्वयं आरोपित व्यक्तियों को ही फरियादी बना दिया।

{हाईकोर्ट पहुंची बात-शिकायतकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दस्तक दी तो नगर निगम कॉलोनी सेल ने डेवलपमेंट और खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई। टीएंडसीपी ने भी मंजूरी रद कर दी।

{एफआईआर के बाद दबाव की राजनीति-क्राइम ब्रांच ने संजय अग्रवाल, नीना अग्रवाल, रितु अग्रवाल और गुरनामसिहं धालीवाल के खिलाफ केस तो दर्ज कर लिया है, लेिकन मामला दबाने की कोिशश भी शुरू हो गई है। दो नंबरी नेताओं के दखल की चर्चा है।