धर्म के नाम पर...

सऊदी अरब से खबर है- मस्जिद में गलत काम करने की वजह से दो को मौत की सजा। कुछ सजा को सही मान रहे तो कुछ गलत। जो सजा सऊदी में मिली, किसी और देश में भले ही ना मिलती, लेकिन हर धर्म में जरूर मिलती। हमारे देश में भी अगर ये किसी मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में होता तो अदालत से सजा भले ही न मिले, पर धर्मांध जान ले लेते। ये जिनकी पूजा करते हैं, वही धरती पर होते तो इन्हें माफ कर देते। मतलब हर धर्म को मानने वाले कट्टर और अंधे हैं। जो सजा को सही बता रहे हैं, इंसान तो कतई नहीं हो सकते और न सच्चे धार्मिक। अगर इनके बच्चे से ऐसा हो जाए तो उसके लिए यही सजा मांगेंगे या जिंदगी जीने का मौका? इन धर्म में अंधों को केन्या का नमूना देखना चाहिए, जहां पादरी पॉल मैकेंजी को चार सौ बच्चों को चर्च में भूखा रखकर मारने के जुर्म में दोषी ठहराया है, जिसे अगले महीने सजा सुनाई जाएगी। पादरी कहता था कि दुनिया का अंत नजदीक है और स्वर्ग जाने के लिए सबको भूखा रहकर जान देनी होगी। बच्चों, किशोरों, महिलाओं और आखिर में पुरुषों को भूखा रखकर मारा था। इस दुनिया में मानव जाति का सबसे ज्यादा नुकसान धर्मों ने ही किया है, सबसे ज्यादा जानें धर्म की वजह से ही गई हैं।