नकल में अकल की बचत खतरनाक है!

विश्व गुरु बन चुका है भारत। कम-से-कम चुनाव जीतने में तो दुनिया को हमसे सीखने की जरूरत है। हमारे हथकंडे अमेरिका में भी इस्तेमाल हो रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति रेवड़ी बांट रहे हैं। युवाओं को हजारों डॉलर देने का लालच दिया। लाड़ली लक्ष्मियों की तर्ज पर ट्रंप ने लाड़ले लड़कों की फौज बनाने की तैयारी कर ली, जिन्हें ‘डॉलर फेंको, तमाशा देखो’ से रिझा रहे हैं। यह बात और है कि वहां के युवा नाराज हैं और ट्रंप की घूस लेने को तैयार नहीं हैं।
ट्रंप ने चुनाव जीतने के लिए मीडिया को काबू करने की कोशिश की है, लेकिन वहां का मीडिया हमारे जैसा बिकाऊ नहीं है। ट्रंप ने उन्हें बंद करने का फरमान जारी किया तो मीडिया अदालत जा पहुंचा। ‘पुष्पा’ के अंदाज में मीडियावालों ने ऐलान कर दिया झुकेगा नहीं…! ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्थानों को फर्जी बताया तो ट्रंप को ही ब्लैक लिस्ट में डाल दिया। ना रहेगा बांस ना बनेगा डंडा!
चतुराई दिखाते व्हाइट हाउस में ही ट्रंप-टीवी चालू कर दिया है। हमारे यहां तो ‘आकाशवाणी’ और ‘दूरदर्शन’ से यही काम कराया जाता रहा है। अब तो तमाम खबरिया चैनलों को भी इसी काम में लगा दिया है। जन्मदिन से फोटो शूट तक संभाल रहे हैं। छवि हो या कपड़े, बताते हैं कि दाग अच्छे हैं। अगर कोई शब्द गलत हो जाए तो साबित कर देते हैं कि सही है। एंकर भी मतलब को ‘मटलब’ बोलने लगते हैं। जैसा उनका गाना-वैसा इनका बजाना। जिसने इनके सुर में सुर नहीं मिलाया, उसका हाल ‘एनडीटीवी’ जैसा!
यहां ट्रंप गच्चा खा गए। हमसे सीखने के बजाय खुद चाल चलने लगे। मीडिया को चुप कराने के चक्कर में चुनाव के मौसम में खबरिया चैनलों से दुश्मनी मोल ले बैठे हैं। ट्रंप की दादागीरी का तरीका है, हरेक से डील करते हैं। ‘सीएनएन’ के दाम लगाने लगे। जब बात नहीं बनी तो अपना टीवी शुरू कर लिया, लेकिन लोगों का भरोसा कमाया जाता है, बाजार में नहीं मिलता। अभी भी समय है, विश्वगुरु की शरण में आ जाओ। यहां गुरु ऐसे गुर सिखाएंगे कि बोल उठोगे- ‘ठोको गुरु।’
हमारे देश में भी कई गुरु को गुरु मानने से इंकार करते हैं, मंच पर उनकी मिमिक्री करवाते हैं। माना कि रोड शो के दौरान हर बार एम्बुलेंस फंस जाती है और फिर उसे रास्ता दिलवाते हैं, लेकिन मंच पर मां को कुर्सी देने का मजाक उड़ाया जाता है तो खुद मजाक बन जाता है। राजनीति लतीफा, कॉमेडी शो नहीं है, रियलिटी शो जैसा है। इधर टीवी पर रियलिटी-शो के साथ ही गेम-शो का दौर शुरू हुआ है। सोचा जा रहा है कि इसी बहाने टीआरपी बढ़ जाएगी। अचानक ही ‘सोनी चैनल’ को लोकप्रियता बढ़ाने का मौका दिखाई दिया। एशियाई खेलों के अधिकार थे तो मौका मिला कि अब तो चैनल पर आएंगे ही। ऐसे में उलझाने के लिए कुछ नया किया जाना चाहिए। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ तो ‘सोनी लिव’ पर पहले से ही चल रहा है।
खेल के मौसम में रोहित शर्मा को ले गेम-शो बना लिया। रोहित से क्या करवाना है, ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है। विदेशी नकल कर ली जाए। अमेरिकी टीवी ‘एबीसी चैनल’ के लोकप्रिय गेम-शो ‘फैमिली फ्यूड’ को चुन लिया, जिसमें स्टीव हार्वे होस्ट हैं। यहां रोहित शर्मा को खड़ा कर दिया। नाम दिया ‘फैमिली फुल हाउस।’ पहले एपिसोड में कई नए-पुराने क्रिकेटर भी लाए। श्रेयस अय्यर, अभिषेक नायर के साथ कुणाल खेमू, निरहुआ वगैरह को इकट्ठा कर लिया। शो के प्रोमो में राकेश बेदी, शिखर धवन और कई कॉमेडियन थे, लेकिन रोहित शर्मा कितनी भीड़ जुटा सकते हैं।
इसी चैनल पर भारती सिंह और हर्ष का गेम-शो भी शुरू है। खेल के नाम पर उठापटक, छीनाझपटी, दौड़-भाग और चीख-पुकार मची रहती है। इसमें मनोरंजन की तलाश मुश्किल है। बच्चे भी इसे देखने के बजाय मोबाइल पर रील देख हैं। उधर ‘जियो हॉटस्टार’ पर अनिल कपूर को होस्ट बनाकर ‘इंडिया के टॉप 1’ पेश किया है। शो हलका है। गंभीर सवालों की जगह मामूली समझ के इस्तेमाल से जवाब खोजने वाले इस शो को अनिल कपूर ‘धनाधिनधा’ वाले अंदाज में पेश कर रहे हैं।
जब इस शो में लड़की की आवाज में लड़का ‘धकधक करने लगा’ गाता है तो समझ लीजिए कि किसी शो से तुलना बेकार है। केबीसी के निर्देशक रहे सिद्धार्थ बसु का नाम भी शो से जुड़ा है और बीबीसी का भी, लेकिन शो में दम नहीं है। रोहित शर्मा और अनिल कपूर को देख सलमान खान का ‘दस का दम’ याद आता है, जिसमें पूछते थे कि कितने फीसद ने यह जवाब दिया है? वैसे सलमान खान का ‘बिग बॉस’ भी दिखाई दे रहा है। ‘जियो हॉटस्टार’ ने चौबीस घंटे का चैनल ‘बिग बॉस’ के नाम कर दिया है लेकिन सलमान खान को देख निराशा हुई। इन बातों से सलमान नाराज हो जाते हैं और कमीज उतारने लगते हैं, लेकिन कैमरा झूट नहीं बोल पा रहा है, उम्र किसे छोड़ती है! ‘जी-टीवी’ पर म्यूजिक शो ‘सारेगामापा’ के नए सीजन की शुरुआत हुई। पहले एपिसोड में सौ से ज्यादा साजिंदों के साथ कोरस गायकों ने बता दिया कि संगीत को भव्य बनाने का इरादा है। जज की कुर्सी पर शंकर महादेवन, नीति मोहन, जावेद अली और कुमार शानू हैं। ‘सारेगामापा’ में गीत-संगीत का सुरीला दौर शुरू होने की उम्मीद तो कर सकते हैं।
हाल ही में लेखक कृष्णा अग्निहोत्री ने दुनिया को अलविदा कहा। उनका जाना स्त्री-विमर्श की बड़ी और साहसिक कहानीकार को विदा करने का दु:खद पल था। कृष्णाजी ने कहानियों में स्त्री संघर्ष को दमदार आवाज दी। उन्हें उस दौर के लेखक में गिना जाता है जिन्होंने पचास बरस पहले लेखन से दबी-कुचली महिलाओं के संघर्ष को पहचान दिलाई। कहानियों के किरदारों की तरह उन्होंने भी जिंदगी अपनी शर्तों पर ही जी। उन्हें बहादुर महिला की तरह याद किया जाएगा, जिसने जिंदगी की तकलीफों को भी ठहाकों में उड़ाने की हिम्मत दिखाई।