नगर निगम सुरक्षा-गार्ड ठेके में घोटाला मिला

इंदौर नगर प्रतिनिधि। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे नगर निगम की कारगुजारियों पर हमलावर है। आरोप लगा रहे है कि चिड़ियाघर में सिक्योरिटी गार्ड रखने के लिये एक साल का टेंडर निकाला था। दोबारा टेंडर किये बिना बारह साल काम करा लिया। एग्रीमेंट की शर्त अनुसार ठेके की मियाद 180 दिन थी। बारह साल तक चला दिया। कांग्रेस लोकायुक्त में शिकायत करेगी।
चौकसे का कहना है कि घोटाले के दस्तावेज है। निगम से 2014 में चिड़ियाघर के लिये सुरक्षा गार्ड, गनमैन, सुपरवाइजर आदि का मेन पावर उपलब्ध कराने के लिए आशापुरी सिक्योरिटी सर्विस शेखर रेजिडेंसी स्कीम नंबर 54 विजय नगर को ठेका दिया था। यह ठेका एक साल के लिए था। बावजूद कंपनी से 12 साल से मैनपॉवर हासिल किया जा रहा है।
2016 में जिंसी वर्कशॉप की सुरक्षा के लिए तत्कालीन आयुक्त ने इसी कंपनी से सुरक्षा गार्ड लेने की मंजूरी दी थी, तब से निगम के अधिकारी इसी कंपनी से मेंन पावर लेते रहे और पैसा भी चुकाते रहे। टेंडर चिड़ियाघर में गार्ड का निकाला था, पूरे निगम में लगा दिए। ठेका भी दोबारा टेंडर की बजाय नोटशीट पर चलता रहा।
चौकसे का कहना है कि इस दौरान निगम में अपर आयुक्त रहे रोहन सक्सेना, वीरभद्र शर्मा, संदीप सोनी, रजनीश कसेरा, एस कृष्ण चैतन्य, ऋषभ गुप्ता, मनोज कुमार चौरसिया, देवघर दरवई और रोहित सिसोनिया इस मामले में आंख बंद रखी। खेल में चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव के साथ लोकेंद्र सिंह सोलंकी, राम गुप्ता, हिमांशु सिंह, सुमित अस्थाना, मनीष पांडे, प्रकाश नागर, लता अग्रवाल, भूपेंद्र सिंह सिसोदिया, आशुतोष यादव और कमलेश त्रिवेदी शामिल रहे। अपर आयुक्त मनोज कुमार पाठक ने नए सिरे से टेंडर कर एजेंसी तय करने की की नोटशीट लिखी थी। उस पर भी अमल नहीं हुआ।
चौकसे का कहना है कि नगर निगम इस एजेंसी को 2016 से लेकर 2026 तक 6 करोड रुपए से अधिक पैसे का भुगतान कर चुका है। ठेके के हिसाब से एक साल का 28.35 लाख रु ही देना था। इस एजेंसी से निगम के विभागों और जोनल कार्यालय में मेन पावर उपलब्ध कराये जाते है। निगम के इवेंट में भी मेन पावर यहीं कंपनी देती है। इसके संचालक देवेंद्र सिंह चौहान है।