शादी नहीं लिखी…!

जिसे पसंद करते थे, उसी ने कह दिया तुम्हारी किस्मत में शादी नहीं है, लेखक रस्किन बांड को पत्नी नहीं मिली, लेकिन उनके साथ कहानियां, किताबें, पहाड़ और पढ़ने वाले अनगिनत मिलते रहे।
जिससे शादी करना चाहते थे, अब दादी अम्मा है। लेखक रस्किन बांड बोले, शायद शादी नहीं करना ही अच्छा रहा।
जिंदगी भी अजीब खेल खेलती है। जिस लड़की के पीछे कभी दिल बिछा रहता है, बरसों बाद किसी की पत्नी, फिर मां और आखिर में दादी बन चुकी होती है। लेखक रस्किन बांड अधूरे प्रेम को 92 साल की उम्र में देखते हैं तो उस अधूरी मोहब्बत पर कोई शिकवा नहीं बल्कि हल्की सी मुस्कान आ जाती है।
रस्किन बांड ने कभी बाकायदा यह फैसला नहीं किया था कि शादी नहीं करेंगे। शादी होते-होते रह गई। एक लड़की को बेहद पसंद करते थे और शादी करना चाहते थे। कोशिश भी की, लेकिन बात शादी तक नहीं पहुंची। समय गुजरता गया, रास्ते अलग हो गए और आज वही लड़की दादी अम्मा बन चुकी है। उसके आसपास पूरा परिवार है।
अब बांड सोचते हैं कि जो हुआ, अच्छा ही हुआ। जिस लड़की के साथ कभी पूरी जिंदगी बिताने का सपना देखा था, आज उसकी जिंदगी बिल्कुल अलग बन चुकी है। रस्किन बांड की अपनी दुनिया किताबों, कहानियों, पहाड़ों और पाठकों से भर गई।
बांड की जिंदगी में मोहब्बत का यह अकेला किस्सा नहीं था। जवानी के दिनों में लंदन में उनकी मुलाकात वियतनामी युवती से हुई थी। बांड उस समय मुश्किल से उन्नीस-बीस साल के थे और दिल पूरी तरह आशिकाना था। वह युवती चाय की प्याली में बची पत्तियों को देख भविष्य बताती थी। बांड ने उससे शादी की इच्छा जताई तो उसने प्याली देखकर भविष्य पढ़ा और कह दिया कि उनकी किस्मत में शादी दिखाई नहीं देती।
आशिक भला इतनी आसानी से कहां मानता है। बांड पीछे लगे रहे लेकिन लड़की ने साफ कह दिया कि पीछा छोड़ दें। दिल टूटा, मगर जिंदगी नहीं रुकी। यही नौजवान आगे चलकर भारत के सबसे पसंद किए जाने वाले लेखकों में शामिल हुआ। हजारों कहानियां लिखीं, लाखों पाठक मिले, लेकिन पत्नी नहीं आई।
रस्किन बांड अपनी अधूरी मोहब्बतों को किसी दुख या पछतावे की तरह नहीं देखते। न किसी को दोष देते हैं, न अपनी किस्मत से शिकायत करते हैं। जैसे पहाड़ों पर मौसम बदलता है, वैसे ही उन्होंने जिंदगी को बदलते देखा और मान लिया।
शायद हर मोहब्बत का अंजाम शादी होना भी नहीं। कुछ लोग जिंदगी में थोड़ी दूर साथ चलकर ही पूरी उम्र की याद बन जाते हैं। रस्किन बांड को पत्नी नहीं मिली, लेकिन तन्हाई भी शायद कभी पूरी तरह नहीं मिली। उनके साथ हमेशा उनकी कहानियां, किताबें, पहाड़ और उन किताबों को पढ़ने वाले अनगिनत लोग रहे।
जिस लड़की से कभी शादी करना चाहते थे, वह आज दादी अम्मा है। इतने बरस बाद इस किस्से में दर्द कम और जिंदगी की शरारत ज्यादा दिखाई देती है।