सत्तर गोल का इनाम...पच्चीस साल बाद ब्रिटिश खिलाड़ी को मिला

· Indore

सत्तर गोल का इनाम...पच्चीस साल बाद ब्रिटिश खिलाड़ी को मिला

लंदन। यहां के ऐतिहासिक पैलेडियम थियटर में सत्तरवें बैलें डी-ऑर अवार्ड की शाम सजी थी, जिसमें पच्चीस साल बाद अंग्रेज खिलाड़ी को यह अवार्ड दिया गया। आखिरी दफा माइकल ओवेन (2001) को ट्रॉफी मिली थी। केन ने इस रेस में किलियन एमबापे, लामिन यमाल और रोड्री को पीछे छोड़ा है। लियोनल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो टॉप-टेन में भी नहीं थे।

पिछला सीजन केन के गजब रहा है। बायर्न म्यूनिख और इंग्लैंड के लिए खेलते हुए गोलों की बरसात कर दी। 73 गोल दागे। जर्मन फुटबॉल में धाक जमाते हुए बायर्न को बुंडेसलीगा और जर्मन कप का डबल खिताब जिताया।

विश्वकप में भी केन का जादू बरकरार रहा। इंग्लैंड को सेमीफाइनल तक ले जाने वाले केन टूर्नामेंट में 6 गोल दागे थे। महान फुटबॉलर गैरी लिनेकर को पीछे छोड़ते हुए विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड बनाया। पहली बार अवार्ड समारोह लंदन में हो रहा है, जबकि पहला बैलें डि-ऑर 1956 में इंग्लैंड के ही खिलाड़ी स्टेनली मैथ्यूज को दिया गया था। उन्हीं के सम्मान में समारोह रखा गया और केन को खिताब मिला। महिलाओं की ट्रॉफी पर एलेक्सिया पुतेलास ने हाथ मारा है। स्पेन की करिश्माई मिडफील्डर ने तीसरी बार महिला बैलें डी-ऑर खिताब जीता है। लगातार तीन बार से अवॉर्ड जीतने वाली ऐताना बोनमाती की चोट ने पुतेलास को ट्रॉफी पर फिर झपट्टा मारने का मौका दिया।

यमाल को बैलें डि-ऑर का दावेदार बताया जा रहा था, लेकिन रेस में एमबापे के बाद तीसरे नंबर पर रहे। यहां भले चूक गए हैं, लेकिन बेस्ट जूनियर खिलाड़ी के लिए मिलने वाली कोपा ट्रॉफी पर फिर कब्जा जमाया है। हैट-ट्रिक पूरी की है। अंडर-21 खिलाड़ी को यह खिताब दिया जाता है, लेकिन उन्नीस का होने से पहले ही तीन बार खिताब जीत लिया है।