इंसान कम हैं... तकनीक से तारीफ!

संत का निधन तैंतीस बरस पहले हो गया, तकनीक से चेहरा सामने आता है, वे बोलते हैं, प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करते हैं और कहते हैं कि भारत आपके साथ है नरेंद्र। यह तकनीक का कमाल हो सकता है, पर सवाल है, जो आज हमारे बीच नहीं हैं, उनके मुंह से आज की राजनीति पर नई बात कहलवाने का फैसला किसने किया! दिल्ली के भारत मंडपम् में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोबॉट से बातचीत की, जिसे एआइ अवतार कहा गया। स्वामी चिन्मयानंद का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। मोदी ने आशीर्वाद मांगा। डिजिटल अवतार ने उन्हें प्रधानमंत्री बने देखकर खुशी जताई और कहा कि भारत आपके साथ है नरेंद्र। मोदी ने कहा कि इस बातचीत से उन्हें 1993 में वडोदरा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात याद आ गई। किसी परिचित का चेहरा और बोलने का अंदाज देखकर यादें लौट आना समझ में आता है। यहां सवाल उस नए साथका है जो दिवंगत संत के डिजिटल अवतार से दिलाया गया। किसी संत के पुराने प्रवचन नई पीढ़ी तक पहुंचाना उपयोगी काम है। उनकी किताबों को आसान भाषा में समझाना भी अच्छा इस्तेमाल हो सकता है, पर उनके चेहरे और आवाज में ऐसी बात सुनाना, जो आज के प्रधानमंत्री के हक में जाती हो, जिम्मेदारी बढ़ा देती है। सुनने वाला तो संत का चेहरा देख रहा होता है, जबकि सामने आ रहे शब्दों के पीछे तकनीक होती है। ‘भारत आपके साथ है’ भी आम आशीर्वाद भर नहीं है। इसमें पूरे देश के साथ का दावा है। देश में साथ वाले भी हैं और सवाल पूछने वाले भी। किसी डिजिटल अवतार को सबकी तरफ से बोलने का अधिकार कैसे मिल गया? संत के लिए श्रद्धा उस वाक्य को ऐसा वजन दे सकती है, जो किसी आयोजक के बयान को शायद न मिले। अभी साफ नहीं है कि संवाद किसने लिखे और मंजूर किए, लेकिन दिवंगत संत के नाम पर ये किस आधार पर पेश किया। मामला नेता तक सीमित नहीं है। यही तरीका किसी और पार्टी या सरकार के लिए इस्तेमाल हो तो सवाल वही रहेगा। किसी दिवंगत हस्ती की लोकप्रियता और उनसे जुड़ी भावनाएं आसानी से प्रचार का सहारा बन सकती हैं। एआइ का नाम लिख देना तकनीक की जानकारी देता है पर उससे हर नया संवाद उस हस्ती का विचार नहीं बन जाता। तकनीक चेहरे और आवाज की नकल कर सकती है, किसी दिवंगत इंसान की आज की सहमति लेकर नहीं आ सकती। स्वामी चिन्मयानंद की याद में बने मंच पर यह बताना भी उतना ही जरूरी था कि उनके डिजिटल चेहरे से सुनाई दे रहे नए शब्द आखिर किसके थे।