‘पुलिस धमकाती.. बताना मत’

देवास के चंदाना में सब नियम-कायदे उसी जहरीली शराब में घोल दिए हैं, जिसे पीने से डेढ़ दर्जन लोगों ने दम तोड़ दिया। गांव के बीचोबीच शराब बिक रही थी। पास ही स्कूल, मंदिर और धर्मशाला है। खरीदने के बाद वहीं बैठ कर पीने का इंतजाम भी है। दुकान बंद करने का वक्त हो जाए, तो घर से बेची जाती थी।
जिस विनोद जायसवाल पर डायरी वाली शराब बेचने का आरोप है, उसके घर और दुकान पर ताला है। पास ही में दो मंजिला आलीशान मकान बन रहा है। गांव वाले बताते हैं कि उसके घर की महिला भी शराब देती थी। बताते हैं कि पूरे देवास क्षेत्र में जहरीली शराब बिक रही है। दूसरी जगह के मुकाबले 10 रुपए सस्ती मिलती है। गमी में आए बीसाखेड़ी के शख्स ने बताया कि मैं मजदूरी करने अलग-अलग जगह जाता हूं। कई जगह पी है। देवास की कड़वी-जहर लगती है।
सरपंच ईश्वर सिंह कह रहे हैं कि सभी मौत शराब से नहीं है… दो महिलाओं की जान भी गई है। पहले से बीमार थीं। उनके मुंडे सिर के बारे में पूछा, तो बोले- पिताजी का निधन हुआ है। कल नुक्ता था। दूसरा सवाल पूछने से पहले ही बोल पड़े- ‘वो अंग्रेजी पीते थे… बांबे अस्पताल में इलाज चल रहा था।’
रोशनी गंवा चुके फूलू परमार ने बताया कि मैंने सुबह 7 बजे पी थी। फिर खाना खाकर गमी में गया। वहां से लौटा, तो चक्कर आ रहे थे। शाम को हाथ-पैर धुजने लगे। नुक्कड़ तक गया कि शायद ठीक लगेगा। वापस लौटते समय धुंधला दिख रहा था। शाम को ही सो गया। सुबह जागा तो कुछ नहीं दिख रहा था। पीने के 24 घंटे बाद आंखें गई हैं।
लड़के राजेश परमार ने कहा कि मेरे छोटे भाई और ताऊ की मौत हो गई है। पिता की आंखें चली गईं। कमाने वाला अकेला हूं। मुझे भी शुगर है… ज्यादा काम नहीं कर पाता हूं। अब घर में महिला और बच्चे ही हैं।
पास खड़ी सिसक रही मां ने कहा- पुलिस हमें धमकाती है कि किसी को कुछ बताना मत। शराब पीना तो अपराध नहीं है। अगर है, तो सरकार क्यों दुकानें खुलवा रही है। सारे जमाने में त्योहार है, लेकिन हमारे गांव में मातम है। दीया तो जल रहा है, लेकिन दीवाली का नहीं… दिवंगत को श्रद्धांजलि का।
इन्हीं के परिवार की लड़की बोली कि पानी गंदा होने का कह कर मामला दबाना चाहते हैं। अगर पानी में कुछ होता, तो पूरा गांव मरता… शराब पीने वाले ही क्यों गए हैं। पांच दिन से शराब बिकनी बंद है। कोई बीमार भी नहीं पड़ा। जब शराब पीने वाले तीन दोस्तों की मौत एक दिन में हुई, तो सहम गए।
अमलतास अस्पताल में कुछ और लोग भर्ती हैं, जिनकी हालत गंभीर है। गांव के नाई ने कहा कि दो हफ्ते से मेरा हाथ बंद नहीं है। गांव में 70 से ज्यादा लोगों का सिर मुंडा है। कोई बोलने से बच रहा है, तो कोई बोलना चाहता है।
जानकार बताते हैं कि शराब में मेथनॉल मिलाते हैं, जो कि बहुत खतरनाक है। रोशनी चली जाती है, सिर की नसें फूलने लगती हैं। इसी से मौत होती है। धुंधला दिखाई देना और सांस में परेशानी होती है। रंग, गंध और स्वाद से पता नहीं लगाया जा सकता।