आमजन के बीच से कही-सुनी कहानी!

टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में प्लेटफार्म सेक्शन में शामिल नगालैंड की फिल्म ‘अंघ’, को अवार्ड मिला। इसके साथ कई बातें हैं, जो पहली बार हो रही हैं।
निर्देशक तेजा रिओ की पहली फिल्म है, यह नगालैंड से फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने वाली पहली फिल्म है और इस अवार्ड के साथ यह फिल्म ऑस्कर अवार्ड के लिए भारत की फिल्म भी बन गई है। ऑस्कर अवार्ड (2027) में गैर-इंग्लिश फिल्म में भी शामिल हो सकती हैं, जिन्हें वेनिस, कान, बर्लिन, टोरंटो, सनडांस या बुसान फिल्म फेस्टिवल में अवार्ड मिला हो।
अंघ का मतलब होता है चीफ या प्रमुख। फिल्म के पहले सीन में प्रमुख अंगबा (आंघलोंग कोन्याक) को देखते हैं, जो शिकार के लिए निकला है, लेकिन गोरे (इंग्लिश पादरी) को देख कर लौट आता है। यहीं समझ आ जाता है कि जनजाति गांव का प्रमुख अकेला है, कोई साथ नहीं है, लेकिन वो समझौता नहीं कर सकता। अंगबा बदला लेने वाला इंसान नहीं है, लेकिन उसे इज़्ज़त का बहुत खयाल है। पत्नी अंग्या (अमाह कोन्याक) बीमार है।
लकड़ी का बना गांव ज़्यादातर सुनसान है। जो ईसाई धर्म अपना चुके हैं, उन्हें गांव में रहने की इजाज़त नहीं है, वे पास के ही इलाके में रहते हैं, जहां उन्हें अंग्रेज़ी सिखाई जाती है, वे चर्च जाते हैं और पश्चिमी कपड़े पहनते हैं। अंगबा को पत्नी का मर जाना मंजूर है, लेकिन प्राकृतिक तरीके के अलावा इलाज मंज़ूर नहीं है।
उन रीति-रिवाजों को देखने का मौका मिलता है, जो मूल नगालैंड के निवासी मानते आये हैं। तेजा रियो खुद नगालैंड से हैं। भारत-म्यामां सीमा के पास इस इलाके को बहुत संवेदनशीलता से दिखाया है। उन्होंने कोन्याक समुदाय के नए कलाकारों को लिया और बातचीत कोन्याक में ही रखी।
फ़िल्म को 16 एम.एम. पर शूट किया, जिससे क्लासिक या पुरानी फ़िल्म जैसा एहसास है। इसलिए, रियो का बेहतरीन काम अहम ऐतिहासिक दस्तावेज़ का भी काम करता है, जो जनजाति और संस्कृति के लिए उस मोड़ को दिखाता है, जहां से वापसी मुमकिन नहीं थी।
रियो उन परंपरा और रिश्तों में दिलचस्पी रखते हैं, जो खो गए हैं, ज़मीन को नुकसान और पूर्वजों से टूटे नाते में। आखिरी पलों में अंघ उस दु:ख को मनाने का मौका मिलता है, जिसे देखा नहीं जा सकता और जिसे अब कभी नहीं देखा जा सकेगा।
रियो की कहानी कहने का अंदाज़ नाजुक है, छोटी-छोटी घटना पर ध्यान देते हैं। रियो इतिहास के ऊंचे मंच से उपदेश नहीं दे रहे हैं। लोगों के बीच, गैलरी में मौजूद हैं- बातें सुन रहे हैं, नोट्स ले रहे हैं और दृश्य फ़िल्मा रहे हैं। यही गहरी और मानवीय भावना है। इतिहास के बजाय आमजन में दिलचस्पी है।
बदलाव को रोक पाना नामुमकिन है, लेकिन उसे किस तरह से याद किया जाता है, यह ख़ास है। रियो इस याद को बेहद खूबसूरत तरीके से संजोने में कामयाब हैं।