ये बाज की आंख है...!

अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, तिलक वर्मा न्यू जीलैंड गेंदबाजों को धुन रहे हैं, लेकिन कप्तान मिचेल सैंटनर की तरफ कोई नहीं लपक रहा। तीन मैच में सात विकेट चटकाए हैं और औसत सात ही है, नहीं तो पिछले मुकाबले में कुछ गेंदबाजों के बाईस थे। सैंटनर दुनिया के उन बिरले उलटे हाथ के स्पिनर में हैं, जिनके आगे उलटे हाथ का बल्लेबाज भी बेबस रहता है। इसके पीछे वार्न, मुरली जैसी टर्न नहीं, बल्कि चश्मे के पीछे छिपी आंखें हैं।
सैंटनर का चेहरा पढऩा सबसे मुश्किल काम है और उससे भी मुश्किल आंखें, जबकि रन-अप में पहला कदम बढ़ाते ही बल्लेबाज को पढऩा शुरू कर देते हैं। जॉग करते हुए आते हैं, लेकिन गेंद फैंकने से पहले हल्का सा रुकते हैं, जैसे फुटबॅाल में पेनल्टी लेते वक्त खिलाड़ी किक से ठीक पहले वक्त लेता है गोलकीपर की चाल समझने के लिए। इसी पॉज में सैंटनर समझ जाते हैं कि बल्लेबाज क्या करने वाला है।
सैंटनर की यह चाल इतनी कामयाब है कि पिच की मदद मायने नहीं रहती। इसलिए कभी-कभी उन्हें फुलटॉस गेंद पर भी विकेट मिल जाते हैं और कभी गेंद इतनी धीमी फैंक देते हैं कि बल्लेबाज सिर पर ही गेंद खड़ी कर देता है। मिशेल सैंटनर क्रिकेटर नहीं होते तो पक्का दिमाग पढ़ने वाले डॉक्टर होते।
भारत पर उलटे हाथ के गेंदबाज हावी हो रहे थे, इसलिए कोच गौतम गंभीर उलटों को लेकर आ गए, पर इसका सैंटनर पर फर्क नहीं पड़ा। 2024 की टेस्ट सीरिज से ही तंग कर रहे हैं। यह बाकी गेंदबाजों के लिए भी सीखने लायक है कि यॉर्कर, स्लोअर, टर्न, तेज सब सीख सकते हैं, लेकिन तब तक बेकार हैं, जब तक बल्लेबाज पढ़ना नहीं आता। इसके बाद फुलटॉस भी मुश्किल गेंद बन जाती है।