तकिए ने दिलाई चांदी...!
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आइची के शूटिंग रेंज तक जाने का सफर खूबसूरत है। 670 मीटर चढऩे के लिए गांवों और झरनों से होकर गुजरना पड़ता है, लेकिन मशक्कत यह है कि दो घंटे में पूरा होता है और देखने के लिए हिलना-डुलना खूब पड़ता है। निशानेबाजों के लिए यह खतरना था। इससे गर्दन पर असर पड़ता। जकडऩ पदक से दूर कर सकती है। तरीका खोजा गया और सलाह दी गई कि तकिया बिना कोई बैठेगा नहीं।
एलावेनिल वलारिवान पहले से गर्दन की समस्या से जूझ रही हैं। रास्तों को निहारने के बजाए तकिया लगा सोना पसंद किया। राइफल कोच मनोज कुमार ने बताया कि कुछ खिलाडिय़ों को बाहर झांकने पर उलटी आने की दिक्कत थी। बस के सिवा जा नहीं सकते थे। इसलिए आंखें मूंदकर जाने के लिए कहा।