बम से फैसले नहीं होते!

इरान पर फिर बम बरसाने की तैयारी है। डोनाल्ड ट्रंप इस बार पहले से ज्यादा ताकत की बातें कर रहे हैं, पर सवाल वहीं कि इतनी लड़ाई के बाद भी जो हासिल नहीं हुआ और बम गिराने से कैसे मिल जाएगा। घर और कारखाने गिराए जा सकते हैं, पर जंग खत्म कैसे होगी, जवाब कौन देगा! नए हमलों के लिए इरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े ठिकानों पर भी नजर है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू में बातचीत हुई है।
इस बार ऐसे अमेरिकी बम की चर्चा भी है, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। नाम सुनकर लगता है कि इसे गिराते ही सब खत्म हो जाएगा, पर इसकी ताकत में फर्क है। यह जमीन के ऊपर बड़ा धमाका करता है जबकि इरान के कुछ परमाणु ठिकाने चट्टानों के नीचे गहराई में हैं। ऐसे ठिकानों को तबाह करने में यह कितना काम आएगा। हां, अगर आबादी के पास गिरा तो जान जरूर खतरे में पड़ सकती है। यानी जिस बम का इतना शोर है उससे तय काम पूरा होगा या नहीं, साफ नहीं है। फिर भी उसे बदल की तरह देखा जा रहा है। किसी शहर को भारी नुकसान पहुंचाना और सरकार से बात मनवा लेना एक बात नहीं है। अगर सिर्फ बम गिराने से सारे फैसले हो जाते तो अब तक बातचीत की जरूरत ही खत्म हो चुकी होती।
पिछली लड़ाई ने तेल और बिजली की कीमतें बढ़ाईं। महंगाई का असर दूसरे देशों तक पहुंचा और पूरे इलाके में डर बढ़ा, पर इरान झुका नहीं। अब फिर ज्यादा ताकत लगाकर उससे शर्तें मनवाने की सोच है। इस बार ऐसा क्या बदलेगा, जो पिछली बार नहीं बदला! अमेरिका में तीन नवंबर को मध्यावधि चुनाव हैं और इजराइल में आज वोट हैं। हमलों की चर्चा भी है। हर तैयारी को चुनावी चाल कहना ठीक नहीं होगा पर नेताओं से हिसाब मांगना गलत भी नहीं है। अगर वोट पर पड़ने वाले असर की चिंता की जा सकती है तो हमले के नीचे आने वाले की जिंदगी की चिंता भी होनी चाहिए।
इरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नया हमला हुआ तो जवाब का दायरा बढ़ेगा। बिजली ठिकानों के साथ डेटा सेंटर और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को भी निशाना बनाने की बात कही है। फिलहाल चेतावनी है पर इससे अंदाजा होता है कि लड़ाई फैली तो कितने की रोजमर्रा की जिंदगी उलझ सकती है। खाड़ी में नौकरी करने गया आदमी किसी जंग में हिस्सा लेने नहीं गया था। वह घर का खर्च चलाने गया था। उसके परिवार को किसी बम की ताकत से ज्यादा लौटने की चिंता है।
अमेरिका और इजराइल से सवाल पूछने का मतलब इरान के हर कदम को सही मान लेना भी नहीं है। जवाब के नाम पर खतरे में डालने की छूट किसी को नहीं मिल सकती। इरान का बच्चा हो या इजराइल का, उसकी जान की कीमत बराबर है। नए हमले की तैयारी करने वालों को बताना चाहिए कि उसके अगले दिन क्या होगा। लड़ाई कहां रुकेगी और समझौता कैसे होगा। जिनका घर उजड़ेगा, कहां जाएंगे। सिर्फ यह बताना काफी नहीं है कि बम कितना बड़ा है। यह भी बताना पड़ेगा कि उससे शांति कैसे आएगी।