पद से बड़ा कद…!

· Indore

पद से बड़ा कद…!

सम्मान का संबंध पद से नहीं, नेता के आचरण और कद से रहता है। गांधीजी तो कभी प्रधानमंत्री रहे नहीं…उनके कद का नेता है, जो दुनिया में आज भी मिसाल है? अटलविहारी वाजपेयी के आगे प्रधानमंत्री भी बौने नजर आते थे कि विराट थे। प्रधानमंत्री हुए और हट गए, सम्मान में कोई कमी न आई। चालीस बरस बाद भी इंदिरा गांधी लौह महिला हैं। जिस अमेरिका के आगे मौजूदा प्रधानमंत्री लाचार नजर आ रहे हैं, उसे उन्होंने उस समय ठेंगा दिखा दिया था, जब देश आज की तरह मजबूत न था। यह कद का कमाल है, पद से कुछ नहीं होता। अभी नरेंद्र मोदी के लिए होने वाली आलोचना में भाजपा दुहाई देने लगती है, प्रधानमंत्री हैं, उन्हें बख्शा जाए। भाजपा भूल जाती है कि जब वह दुनिया के माने हुए विद्वान मनमोहन सिंह का मजाक बनाती थी, सिंह भी तो उसी पद पर थे, जिसकी दुहाई अब दी जा रही है। जिस कायदे का पालन भाजपा ने नहीं किया, वह उसे अब इसलिए याद आ रहा है कि बचाव में कुछ बचा नहीं। बाकी मोर्चों पर नाकामी, राजनीतिक और प्रशासनिक हो सकती है, व्यवहार में नेता का आचरण कसौटी पर खरा उतरना चाहिए, वही कद बढ़ाता है। इस मामले में नरेंद्र मोदी खरे नहीं उतरते और यही कारण है कि प्रधानमंत्री होकर भी उनके हिस्से गालियां आ रही हैं। याद रखने वाली बात है कि यह सब आम आदमी कर रहा है। उसकी नजर में पद और कद दोनों गौण हो गए तो यह नौबत आ गई!

प्रचार के झूटे रवैये ने खीज पैदा की, जो गालियों का कारण बनी। मसलन, अभी छात्रों की गूंज में प्रधानमंत्री की माताजी का कोई जिक्र नहीं, पूरी भाजपा बिफर पड़ी। उनकी माता का अपमान बता दिया। जिसे करोड़ों लोग देख रहे हैं, उसमें ऐसी सरासर गलत बयानी कद भी कम करती है और पद का मान भी जाता रहता है। पद का मान रखने के लिए व्यवहार भी वैसा चाहिए। पचास लाख की गर्लफ्रेंड और कांग्रेस की विधवा के अलावा जर्सी गाय बोलते समय यदि ध्यान रखा होता कि प्रधानमंत्री को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते तो शायद कद कायम होता और लोग बोलने के पहले पद-मान की चिंता करते। जैसा देते हैं, वैसा ही लौटकर आता है।