विधायक ही सर्वोपरि हैं!

सत्ता से अलग संगठन चलाने की बात भाजपा अक्सर करती है, लेकिन इससे निकल नहीं पाती है। अभी जिनको वार्ड अध्यक्ष या दूसरी जिम्मेदारी दी गई है, सबमें विधायकों का दखल है। उनकी मर्जी से ही बनाया गया है और कहीं कोई चुनौती नहीं दे पाया है। यानी इंदौर की भाजपा चल तो विधायकों के हिसाब से ही रही है। इंदौर विकास प्राधिकरण में किसको बनाना है, नाम विधायकों से लिए जा रहे हैं। एल्डरमैन के लिए उनसे ही बात हुई है और अब वार्ड अध्यक्ष उनकी मर्जी से बने हैं। कहने को संगठन सर्वोपरि है, पर विधायक ही ताकतवर हैं। उनके बगैर कुछ होता नहीं है। शहर भाजपा की जो टीम बनती है, उसमें विधायकों का दखल रहता है।
पार्षदों को टिकट विधायकों के हिसाब से मिलेंगे। यानी मान लिया जाए कि विधायक का हर तरफ पैर फंसा है। मधु वर्मा से लेकर गोलू शुक्ला तक किसी ने दूसरे को जगह नहीं दी है, जबकि जीतू जिराती लगातार राऊ में कोशिश कर रहे हैं, पर संगठन में अपनों को जगह तो नहीं दिला पाए हैं। गोलू ने पुराने सारे वार्ड अध्यक्षों को बदल दिया है, क्योंकि आकाश विजयवर्गीय के बनाए हुए थे। एक नंबर में आकाश ने अपनी मर्जी से सबको बना लिया है। यानी जो जहां ताकत में आया है, उसने अपनी चला ली है। वैसे तीन नंबर में अभी तो वार्ड अध्यक्ष बदले गए हैं। बारी पार्षदों की है और देखना रहेगा कि कितने बदलते हैं। पर इतना तय है कि संगठन का कितना ही ढोल बजाया जाए, लेकिन वो है तो विधायकों के शिकंजे में कि उनकी मर्जी के बगैर कुछ होता नहीं है!