नरोत्तम तो नकार दिए गए!

दतिया में भाजपा की हार के साथ ही नरोत्तम मिश्रा की सियासत पूरी हो गई थी। आखिरी कील कोर कमेटी को लेकर थी कि वहां नाम था। हालांकि, शिकस्त के बाद जो मीटिंग हुई थी, उसमें उन्हें बुलाया नहीं गया था और अब तो कमेटी से रवाना ही कर दिया गया है। नए जो नाम आए हैं, उनमें पुराने गृहमंत्री नहीं हैं। यानी भोपाल आने का बहाना खत्म हो गया है और भाजपा की पहली कतार वाली सियासत में नरोत्तम के लिए जगह नहीं है।
नए प्रभारी के साथ जो नई लिस्ट जारी हुई है, उसमें सब हैं, बस इनको ही रवाना किया गया है। वैसे मिश्रा के घर हेमंत खंडेलवाल पहुंच गए थे, जिनका जोर-जोर से स्वागत हुआ है, पर जगह तो चली ही गई है। नरोत्तम को जिस तरह लगातार पीछे धकेला जा रहा है और कहीं से मदद नहीं मिल रही है, उससे इतना समझ आ गया कि अमित शाह से मजबूत रिश्तों का जो गुब्बारा बना हुआ था, उसकी हवा निकल गई है। गृहमंत्री जिसे पसंद करते हों, उसे कोई कैसे कमजोर कर सकता है, लेकिन नरोत्तम का टिकट काटा गया। साथियों को बेदखल किया और अब उनके लिए रास्ते तंग कर दिए गए हैं। अभी जो माहौल है, उसे देखकर लगता है कि अगले चुनाव में भी उनके लिए कुछ बन नहीं रहा है। वैसे अगर दतिया को हजम कर जाते और टिकट कटने पर खामोश रह जाते, तो राज्यसभा के दावेदार हो सकते थे, लेकिन जिस तरह फजीहत हुई है, उससे लगता है कि वहां भी दाल नहीं गलने वाली थी। जो भी हो, लेकिन भाजपा का मजबूत नेता फिलहाल हाशिए पर है और ऐसे दोराहे पर जहां से कोई राह निकलती दिख नहीं रही है। बल्कि, जो दिया टिमटिमा रहा था, उसे भी बुझा दिया गया है!