‘जो भी सत्ता में आता, न्यायपालिका पर अधिकार चाहता, विपक्ष की बंदूक के लिए हम कंधा नहीं देंगे’

· Indore

पूर्व चीफ.. जस्टिस संजय किशन कॉल ने कहा
पूर्व चीफ.. जस्टिस संजय किशन कॉल ने कहा

ज्ञान की बात कम-अक्ल करें तो बर्दाश्त नहीं होता

नई दिल्ली। ‘‘मेरी किताब का मकसद विपक्ष की बंदूक के लिए कंधा देना नहीं है। मैं तो इस सिस्टम में सुधार की बात कह रहा हूं। यदि अच्छी बात का जिक्र है तो कमजोरियों पर भी नजर डालनी होगी। यह कहना गलत है कि मेरी किताब से न्यायपालिका पर जनता का भरोसा कम होगा। सुधार से तो उम्मीद ही बढ़ेगी।’’ कहना है पूर्व चीफ-जस्टिस संजय किशन कौल का, जिनकी किताब, बाज़ार में आने से पहले ही धूम मचा रही है।

बीबीसी को इंटरव्यू में कौल ने कहा कि मैंने यही बात लिखी है कि सरकारी वकीलों को ही नहीं, दूसरे अच्छे वकीलों को भी न्यायाधीश बनाया जाना चाहिए। दिल्ली की नामी वकील का न्यायाधीश होना, हर तरफ से तय हो गया था, उनके दस्तखत यानी सहमति भी ले ली गई थी, लेकिन जब सूची जारी हुई तो उनका नाम गायब था।

इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई और फिर कभी बताया, या उन्हें नहीं बनाया। इसलिए नामी वकील बचते हैं, न्यायाधीश बनने से। किसी ने कभी कोई भाषण दे दिया या कुछ बात कह दी, तो सिर्फ इस आधार पर जज नहीं बनने देना गलत है।

पूछा गया कि जब चार सुप्रीम कोर्ट जज ने प्रेस कांफ्रेंस की थी, तो आपने असहमति जताई थी, जबकि आपकी किताब भी तो अंदर की बातें बाहर कर रही है?

इस पर कौल साहब का जवाब था- जब आप सेवा में हैं तो शपथ और शर्तों से बंधे हैं। रिटायर होने के तीन साल बाद मैंने किताब लिखी है और उसमें सुधार की बात कही है। यह मेरे इतने बरसों के अनुभव का निचोड़ है। सरकार की न्यायपालिका के काम में कोई भूमिका नहीं हो सकती।

‘’मैं अभी भी सोशल मीडिया पर नहीं हूं, क्योंकि कम-अक्ल लोग जब ज्ञान की बातें करते हैं तो मुझे बर्दाश्त नहीं होतीं। मुझे नहीं मालुम मेरे बारे में क्या लिखा या बोला जा रहा है। जब सेवा में था तो चित्रकार मकबूल फ़िदा हुसैन को मैंने ही क्लीन-चिट दी थी और राफेल मामले में सरकार के खिलाफ फैसला भी दिया था। जस्टिस चंद्रचूड़ और मैं, कॉलेज के साथी रहे हैं। उनकी गलत बात पर असहमति है, तो उनकी समझ और विद्वता का मैं सम्मान करता हूं। हां, हमारी सोच में फर्क जरूर रहा।’’ कहते हैं कौल।

बताते हैं कि कानूनी भाषा आम-जन की समझ में नहीं आती है, इसलिए मैंने यह किताब लिखी है कि कोई भी पढ़ सके और आसानी से समझ सके।