‘चोरों का गिरोह’ कहा था... भारतीय फिल्मी दुनिया को
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भारतीय फिल्मी दुनिया को लेखक जेफ्री आर्चर ने ‘चोरों का गिरोह’ कह दिया था। उनकी किताबों से कहानियाँ उठाकर फिल्में बना ली। न अनुमति ली गई, न भुगतान किया। यह बयान (2015) उस लेखक की शिकायत थी, जिसे अपनी कहानी परदे पर तो दिखी मगर किसी ने पूछा तक नहीं।
आर्चर ने दो फिल्मों का नाम लिया; ‘खुदगर्ज’ और ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’। उनका आरोप था कि ‘खुदगर्ज’ की कहानी ‘केन एंड एबेल’ से ली गई जबकि ‘लेडीज वर्सेज रिकी बहल’ में ‘नॉट अ पेनी मोर, नॉट अ पेनी लेस’ पर बनी है।
आर्चर कहानियों पर भारतीय फिल्म या टीवी कार्यक्रम के खिलाफ नहीं थे। उनकी शिकायत पूछे बिना इस्तेमाल से थी। रॉनी स्क्रूवाला से ‘द क्लिफ्टन क्रॉनिकल्स’ को टीवी पर लाने के लिए सलाह मांगी थी।