हूरुन इंडिया की वेल्थ लिस्ट पर उठे सवाल, क्या छिपी हुई संपत्तियां रह जाती हैं अनदेखी?

हुरुन इंडिया मुंबई से चलता है और एम3एम जैसे प्रायोजकों के साथ जारी किया जाता है। यह लिस्ट कंपनियों के हिसाब-किताब और रिसर्च पर बनती है। मकसद है कारोबारियों को बढ़ावा देना और उनकी कहानियाँ सामने लाना।
भारत के सबसे अमीर लोगों के नाम, उनकी दौलत के आंकड़े सुर्खियाँ बन जाते हैं। क्या इस सूची में कई ऐसे लोग गायब हैं, जिनकी असली संपत्ति, कहीं अधिक है!
हूरुन कहता है कि दौलत का आकलन ‘कला है और विज्ञान भी’। वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, शेयर होल्डिंग्स, कंपनी फाइलिंग्स और उद्योग विशेषज्ञों से बात करके सूची बनाते हैं, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी सीमा भी है। जो संपत्ति रिकॉर्ड में नहीं, वो गायब रह जाती है। लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कीमत को जोड़ा जा सकता है। निजी कंपनियों के लिए वे समान उद्योग की लिस्टेड कंपनियों के (पी/ई) रेशियो या हालिया फंडिंग राउंड का इस्तेमाल करते हैं।